Saturday, April 21, 2007

मेरे मन ये बता दे तू
किस ओर चला है तू ?
क्या पाया नहीं तूने ?
क्या ढ़ूंढ़ रहा है तू ?

जो है अनकही , जो है अनसुनी, वो बात क्या है बता ?
मितवा ऽऽऽऽऽऽ, कहें धड़कनें तुझसे क्या, मितवा ऽऽऽऽऽऽऽऽऽ, ये खुद से तो ना तू छुपा

जीवन डगर में, प्रेम नगर में
आया नजर में जब से कोई है
तू सोचता है! तू पूछता है !
जिसकी कमी थी, क्या ये वही है ?
हाँ ये वही है, हाँ ये वही है ऽऽऽऽऽऽऽऽ
तू इक प्यासा और ये नदी हैऽऽऽ
काहे नहीं, इसको तू, खुल के बताये
जो है अनकही .................ना तू छुपा

तेरी निगाहें पा गयी राहें
पर तू ये सोचे जाऊँ ना जाऊँ
ये जिंदगी जो, है नाचती तो
क्यूँ बेड़ियों में हैं तेरे पाँव?
प्रीत की धुन पर नाच ले पागलऽऽऽऽ
उड़ता अगर है, उड़ने दे आंचलऽ
काहे कोई, अपने को, ऐसे तरसाए
जो है अनकही .................ना तू छुपा




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प्रीत की लत मोहे ऐसी लागी
हो गई मैं मतवारी
बलि बलि जाऊँ अपने पिया को
कि मैं जाऊँ वारी वारी
मोहे सुध बुध ना रही तन मन की
ये तो जाने दुनिया सारी
बेबस और लाचार फिरूँ मैं
हारी मैं दिल हारी..हारी मैं दिल हारी..
तेरे नाम से जी लूँ, तेरे नाम से मर जाऊँ..
तेरे जान के सदके में कुछ ऐसा कर जाऊँ
तूने क्या कर डाला ,मर गई मैं, मिट गई मैं
हो री...हाँ री..हो गई मैं दीवानी दीवानी
इश्क जुनूं जब हद से बढ़ जाए
हँसते-हँसते आशिक सूली चढ़ जाए
इश्क का जादू सर चढ़कर बोले
खूब लगा दो पहरे, रस्ते रब खोले
यही इश्क दी मर्जी है, यही रब दी मर्जी है,
तूने क्या कर डाला ,मर गई मैं, मिट गई मैं
हो री...हाँ री..हो गई मैं दीवानी दीवानी
कि मैं रंग-रंगीली दीवानी
कि मैं अलबेली मैं मस्तानी
गाऊँ बजाऊँ सबको रिझाऊँ
कि मैं दीन धरम से बेगानी
की मैं दीवानी, मैं दीवानी
तेरे नाम से जी लूँ, तेरे नाम से मर जाऊँ..
तेरे जान के सदके में कुछ ऐसा कर जाऊँ
तूने क्या कर डाला ,मर गई मैं, मिट गई मैं
हो री...हाँ री..हो गई मैं दीवानी दीवानी


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ना गिलाफ, ना लिहाफ
ठंडी हवा भी खिलाफ ससुरी
इतनी सर्दी है किसी का लिहाफ लइ ले
ओ जा पड़ोसी के चूल्हे से आग लइ ले
बीड़ी जलइ ले, जिगर से पिया
जिगर मा बड़ी आग है...

धुआँ ना निकारी ओ लब से पिया, अह्हा
धुआँ ना निकारी ओ लब से पिया
ये दुनिया बड़ी घाघ है
बीड़ी जलइ ले, जिगर से पिया
जिगर मा बड़ी आग है...

ना कसूर, ना फतूर
बिना जुलुम के हुजूर
मर गई, हो मर गई,
ऐसे इक दिन दुपहरी बुलाई लियो रे
बाँध घुंघरू कचहरी लगाइ लियो रे
बुलाई लियो रे बुलाई लियो रे
लगाई लियो रे कचहरी
अंगीठी जरई ले, जिगर से पिया
जिगर मा बड़ी आग है....

ना तो चक्कुओं की धार
ना दराती ना कटार
ऐसा काटे कि दाँत का निशान छोड़ दे
जे कटाई तो कोई भी किसान छोड़ दे
ओ ऐसे जालिम का छोड़ दे मकान छोड़ दे
रे बिल्लो, जालिम का छोड़ दे मकान छोड़ दे

ना बुलाया, ना बताया
मारे नींद से जगाया हाए रे
ऐसा चौंकी की हाथ में नसीब आ गया
वो इलयची खिलई के करीब आ गया

कोयला जलइ ले, जिगर से पिया
जिगर मा बड़ी आग है


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वो लोग बहुत खुशकिस्मत थे
जो इश्क को काम समझते थे
या काम से आशिकी करते थे
हम जीते जी मशरूफ* रहे
कुछ इश्क किया कुछ काम किया
काम इश्क के आड़े आता रहा
और इश्क से काम उलझता रहा
फिर आखिर तंग आकर हमने
दोनों को अधूरा छोड़ दिया
 
 

ये चाँद भी क्या हसीं सितम ढाता है
बचपन में मामा और जवानी में सनम नजर आता है
 
 
 
ऐ चाँद खूबसूरत !
ऐ आसमां के तारे
तुम मेरे संग जमीं पर थोड़ी सी रात गुजारो
कुछ अपनी तुम कहो
कुछ लो मेरी खबर
हो जाए दोस्ती कट जाए ये सफर
 
 
आदमी बुलबुला है पानी का
और पानी की बहती सतह पर टूटता भी है डूबता भी है
फिर उभरता है फिर से बहता है
ना समंदर निगल सका इसको , ना तवारीख तोड़ पाई है
वक्त की मौज पर सदा बहता
आदमी बुलबुला है पानी का
 
 
क्या बतायें कि जां गई कैसे ?
फिर से दोहरायें वो घड़ी कैसे ?

किसने रस्ते में चाँद रखा था
मुझको ठोकर वहाँ लगी कैसे ?

वक्त पे पाँव कब रखा हमने
जिंदगी मुँह के बल गिरी कैसे ?

आँख तो भर गई थी पानी से
तेरी तसवीर जल गई कैसे ?

हम तो अब याद भी नहीं करते
आपको हिचकी लग गई कैसे ?
 
 
तुम इतना जो मुस्करा रहे हो
क्या गम है जिसको छुपा रहे हो

आँखों में नमी हँसी लबों पर
क्या हाल है क्या दिखा रहे हो
 
 
 
 


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एक ऐसा गीत गाना चाह्ता हूं,
मैं..खुशी हो या गम,
बस मुस्कुराना चाह्ता हूं,
मैं..दोस्तॊं से दोस्ती तो हर कोई निभाता है..
दुश्मनों को भी अपना दोस्त बनाना चाहता हूं,
मैं..जो हम उडे ऊचाई पे अकेले,
तो क्या नया किया..
साथ मे हर किसी के पंख फ़ैलाना चाह्ता हूं,
मैं..वोह सोचते हैं कि मैं अकेला हूं उन्के बिना..तन्हाई साथ है मेरे,
इतना बताना चाह्ता हूं..ए खुदा, तमन्ना बस इतनी सी है..
कबूल करना..मुस्कुराते हुए ही तेरे पास आना चाह्ता हूं,
मैं..बस खुशी हो हर पल,
और मेहकें येह गुल्शन सारा "अभी"..हर किसी के गम को,
अपना बनाना चाह्ता हूं,
मैं..एक ऐसा गीत गाना चाह्ता हूं,
मैं..खुशी हो या गम,
बस मुस्कुराना चाह्ता हूं, मैं