
Friday, February 22, 2008
Saturday, February 16, 2008
एक अंधी लडकी थी ।
उसे उसके एक दोस्त के अलावा सबने ठुकरा दिया था ।
पर वो दोस्त उससे बहुत प्यार करता था ।
लडकी रोज़ उससे ये कहती कि अगर वो उसे देख पाती तो उसी से शादी करती ।
एक दिन किसी ने उस लडकी को अपने आंखे दे दीं ।
जब वो देख सकने लगी तो उसने देखा की उसका वह दोस्त अंधा था ।
दोस्त ने उससे पूछा की क्या अब वो उससे शादी करेगी ?
लडकी ने साफ़ इनकार कर दिया ।
इस पर उसका दोस्त मुस्कुराया और चुप चाप उसे एक कागज़ देकर चला गया
। उसपर लिखा था -"मेरी आखों का ख्याल रखना"
Kya Yahi Payar hai????????????
उसे उसके एक दोस्त के अलावा सबने ठुकरा दिया था ।
पर वो दोस्त उससे बहुत प्यार करता था ।
लडकी रोज़ उससे ये कहती कि अगर वो उसे देख पाती तो उसी से शादी करती ।
एक दिन किसी ने उस लडकी को अपने आंखे दे दीं ।
जब वो देख सकने लगी तो उसने देखा की उसका वह दोस्त अंधा था ।
दोस्त ने उससे पूछा की क्या अब वो उससे शादी करेगी ?
लडकी ने साफ़ इनकार कर दिया ।
इस पर उसका दोस्त मुस्कुराया और चुप चाप उसे एक कागज़ देकर चला गया
। उसपर लिखा था -"मेरी आखों का ख्याल रखना"
Kya Yahi Payar hai????????????
Friday, February 8, 2008
मैं कभी बतलाता नहीं
पर अँधेरे से डरता हूँ मैं माँ
यूँ तो मैं ,दिखलाता नहीं
तेरी परवाह करता हूँ मैं माँ
तुझे सब हैं पता , हैं न माँ
तुझे सब हैं पता ,,मेरी माँ
भीड़ में यूँ न छोरो मुझे

घर लौट के भी आ ना पाऊँ माँ
भेज न इतना दूर मुझको तू
याद भी तुझको आ ना पाऊँ माँ
क्या इतना बुरा हूँ मैं माँ
क्या इतना बुरा मेरी माँ
जब भी कभी पापा मुझे
जो जोर से झूला झुलाते हैं माँ
मेरी नज़र ढूंढें तुझे
सोचु यही तू आ के थामेगी माँ
उनसे मैं यह कहता नहीं
पर मैं सहम जाता हूँ माँ
चेहरे पे आने देता नहीं
दिल ही दिल में घबराता हूँ माँ
तुझे सब है पता है ना माँ
तुझे सब है पता मेरी माँ
मैं कभी बतलाता नहीं
पर अँधेरे से डरता हूँ मैं माँ
यूँ तो मैं ,दिखलाता नहीं
तेरी परवाह करता हूँ मैं माँ
पर अँधेरे से डरता हूँ मैं माँ
यूँ तो मैं ,दिखलाता नहीं
तेरी परवाह करता हूँ मैं माँ
तुझे सब हैं पता , हैं न माँ
तुझे सब हैं पता ,,मेरी माँ
भीड़ में यूँ न छोरो मुझे

घर लौट के भी आ ना पाऊँ माँ
भेज न इतना दूर मुझको तू
याद भी तुझको आ ना पाऊँ माँ
क्या इतना बुरा हूँ मैं माँ
क्या इतना बुरा मेरी माँ
जब भी कभी पापा मुझे
जो जोर से झूला झुलाते हैं माँ
मेरी नज़र ढूंढें तुझे
सोचु यही तू आ के थामेगी माँ
उनसे मैं यह कहता नहीं
पर मैं सहम जाता हूँ माँ
चेहरे पे आने देता नहीं
दिल ही दिल में घबराता हूँ माँ
तुझे सब है पता है ना माँ
तुझे सब है पता मेरी माँ
मैं कभी बतलाता नहीं
पर अँधेरे से डरता हूँ मैं माँ
यूँ तो मैं ,दिखलाता नहीं
तेरी परवाह करता हूँ मैं माँ
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